Hindutva (SAVARKAR): Exploring the Idea of Hindu Nationalism


Price: [price_with_discount]
(as of [price_update_date] – Details)


[ad_1]

From the Publisher

Hindutva by Vinayak Damodar Savarkar

Hindutva by Vinayak Damodar Savarkar

Hindutva by Vinayak Damodar Savarkar

भारतीय क्रांतिकारी इतिहास में स्वातंत्रवीर विनायकदामोदर सावरकर का व्यक्तित्व अप्रतिम गुणों का द्योतक है।

‘हिंदुत्व’ एक ऐसा शब्द है, जो संपूर्ण मानवजाति के लिए आज भी अपूर्व स्फूर्ति तथा चैतन्य का स्रोत बना हुआ है। इस शब्द से संबद्ध विचार, महान् ध्येय, रीति-रिवाज तथा भावनाएँ कितनी विविध तथा श्रेष्ठ हैं। ‘हिंदुत्व’ कोई सामान्य शब्द नहीं है। यह एक परंपरा है। एक इतिहास है। यह इतिहास केवल धार्मिक अथवा आध्यात्मिक इतिहास नहीं है। अनेक बार ‘हिंदुत्व’ शब्द को उसी के समान किसी अन्य शब्द के समतुल्य मानकर बड़ी भूल की जाती है। वैसे यह इतिहास मात्र नहीं है, वरन् एक सर्वसंग्रही इतिहास है। ‘हिंदू धर्म’, यह शब्द ‘हिंदुत्व’ से ही उपजा उसी का एक रूप है, उसी का एक अंश है। ‘हिंदुत्व’ शब्द में एक राष्ट्र, हिंदूजाति के अस्तित्व तथा पराक्रम के सम्मिलित होने का बोध होता है। इसीलिए ‘हिंदुत्व’ शब्द का निश्चित आशय ज्ञात करने के लिए पहले हम लोगों को यह समझना आवश्यक है कि ‘हिंदू’ किसे कहते हैं। इस शब्द ने लाखों लोगों के मानस को किस प्रकार प्रभावित किया है तथा समाज के उत्तमोत्तम पुरुषों ने, शूर तथा साहसी वीरों ने इसी नाम के लिए अपनी भक्तिपूर्ण निष्ठा क्यों अर्पित की, इसका रहस्य ज्ञात करना भी आवश्यक है। प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं ध्येयनिष्ठ क्रांतिधर्मा वीर सावरकर की लेखनी से निःसृत ‘हिंदुत्व’ को संपूर्णता में परिभाषित करती अत्यंत चिंतनपरक एवं पठनीय पुस्तक|

Kala Pani by Vinayak Damodar Savarkar

Kala Pani by Vinayak Damodar Savarkar

1857 Ka Swatantraya Samar by Vinayak Damodar Savarkar

1857 Ka Swatantraya Samar by Vinayak Damodar Savarkar

Main Savarkar Bol Raha Hoon by Shiv Kumar Goyal

Main Savarkar Bol Raha Hoon by Shiv Kumar Goyal

SAVARKAR KE TOP 100 PRERAK VICHAR BY SHIV KUMAR GOYAL

SAVARKAR KE TOP 100 PRERAK VICHAR BY SHIV KUMAR GOYAL

Kala Pani by Vinayak Damodar Savarkar

काला पानी की भयंकरता का अनुमान इसी एक बात से लगाया जा सकता है कि इसका नाम सुनते ही आदमी सिहर उठता है। काला पानी की विभीषिका; यातना एवं त्रासदी किसी नरक से कम नहीं थी। विनायक दामोदर सावरकर चूँकि वहाँ आजीवन कारावास भोग रहे थे; अत: उनके द्वारा लिखित यह उपन्यास आँखों-देखे वर्णन का-सा पठन-सुख देता है। इस उपन्यास में मुख्य रूप से उन राजबंदियों के जीवन का वर्णन है; जो ब्रिटिश राज में अंडमान अथवा ‘काला पानी’ में सश्रम कारावास का भयानक दंड भुगत रहे थे। काला पानी के कैदियों पर कैसे-कैसे नृशंस अत्याचार एवं क्रूरतापूर्ण व्यवहार किए जाते थे;

1857 Ka Swatantraya Samar by Vinayak Damodar Savarkar

वीर सावरकर रचित ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विश्‍व की पहली इतिहास पुस्तक है; जिसे प्रकाशन के पूर्व ही प्रतिबंधित होने का गौरव प्राप्‍त हुआ। इस पुस्तक को ही यह गौरव प्राप्‍त है कि सन् 1909 में इसके प्रथम गुप्‍त संस्करण के प्रकाशन से 1947 में इसके प्रथम खुले प्रकाशन तक के अड़तीस वर्ष लंबे कालखंड में इसके कितने ही गुप्‍त संस्करण अनेक भाषाओं में छपकर देश-विदेश में वितरित होते रहे। इस पुस्तक को छिपाकर भारत में लाना एक साहसपूर्ण क्रांति-कर्म बन गया।

Main Savarkar Bol Raha Hoon by Shiv Kumar Goyal

‘वीर सावरकर’—यह शब्द साहस; वीरता; देशभक्ति; दूरदर्शी राजनीतिज्ञ का पर्याय बन गया है। स्वातंत्र्यवीर सावरकर न केवल स्वाधीनता-संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे अपितु वह एक महान् क्रांतिकारी; चिंतक; सिद्धहस्त लेखक; सशक्त कवि; ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे।

SAVARKAR KE TOP 100 PRERAK VICHAR BY SHIV KUMAR GOYAL

ऐसे प्रथम भारतीय नागरिक, जिन पर हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चलाया गया। ऐसे प्रथम क्रांतिकारी, जिन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा दो बार आजन्म कारावास की सजा सुनाई गई। प्रथम साहित्यकार, जिन्होंने लेखनी और कागज से वंचित होने पर भी अंडमान जेल की दीवारों पर कीलों, काँटों और यहाँ तक कि नाखूनों से विपुल साहित्य का सृजन किया और ऐसी सहस्रों पंक्तियों को वर्षों तक कंठस्थ कराकर अपने सहबंदियों द्वारा देशवासियों तक पहुँचाया।

Click & Buy

विनायक दामोदर सावरकर

विनायक दामोदर सावरकर

विनायक दामोदर सावरकर

1 जून, 1906 को इंग्लैंड के लिए रवाना। इंडिया हाउस, लंदन में रहते हुए अनेक लेख व कविताएँ लिखीं ।
1907 में ‘ 1857 का स्वातंत्र्य समर ‘ ग्रंथ लिखना शुरू किया ।
प्रथम भारतीय नागरिक जिन पर हेग के अंतरराष्‍ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चलाया गया ।
प्रथम क्रांतिकारी, जिन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा दो बार आजन्म कारावास की सजा सुनाई गई ।

Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan (1 January 2020); Prabhat Prakashan – Delhi
Language ‏ : ‎ Hindi
Hardcover ‏ : ‎ 144 pages
ISBN-10 ‏ : ‎ 9389982030
ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9389982039
Item Weight ‏ : ‎ 322 g
Dimensions ‏ : ‎ 13.97 x 1.27 x 21.59 cm
Country of Origin ‏ : ‎ India
Packer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan – Delhi
Generic Name ‏ : ‎ Books

[ad_2]

error: Alert: Content selection is disabled!!